Sunday, 23 October 2016

Hanuman Ji History In Temples

Lord Hanuman is well known for his extreme devotion to Lord Rama. Lord Hanuman is always depicted in the Indian folklaire as an icon of true devotion and a symbol of the power of true devotion and chastity.
Lord Hanuman's devotion to Lord Rama is symbolic of the devotion of the enlightened individual soul towards the supreme soul.
Many stories from the Indian literature tell the tales of Lord Hanuman protecting devotees of Lord Rama and helping those who seek his either spiritually or otherwise. Swami Tulasidas has written these lines in respect of Lord Hanuman's great character, in praise of his powers and also devotion.


Hanuman Ji History In Temples:


भारत के प्रसिद्ध 16 हनुमान मंदिर (16 famous Hanuman Temple of India)

JULY 9, 2014 BY AG 12 COMMENTS

इस लेख में आप सब भारत के विभिन्न हिस्सों में स्तिथ 16 प्रसीद्ध हनुमान मंदिरों की बारे में जानकारी पाएंगे। इनमे से हर मंदिर की अपनी एक विशेषता है कोई मंदीर अपनी प्राचीनता की लिये फेमस है तो कोइ मंदीर अपनी भव्यता के लिए। जबकि कई मंदिर अपनी अनोखी हनुमान मूर्त्तियों के लिए जैसे की इलाहबाद का हनुमान मंदीर जहां की भारत की एक मात्र लेटे  हुए हनूमान की प्रतिमा है जबकि इंदौर के उलटे हनुमान मंदिर में भारत कि एक मात्र उलटे हनुमान कि प्रतीमा  हैं इसी तरह रतनपुर के गिरिजाबंध हनुमान मंदिर में स्त्री रुप में हनुमान प्रतीमा है।  इन सबसे अलग गुजरात के जामनगर के बाल हनूमान मंदीर का नाम एक अनोखे रिकॉर्ड क़े कारण गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।1. हनुमान मंदिर, इलाहबाद, उत्तर प्रदेश (Hanuman Temple,  Allahabad,  Uttar Pradesh) :





Hanuman Jyanti

Hanuman Chalisa In English

Hanuman Chalisa In Hindi


Bajrang Baan - Most Powerful Mantra

Sankat Mochan Hanuman Aashtak




Sleeping Hanuman Temple, Allahabad, Uttar Pradesh
Sleeping Hanuman Temple, Allahabad, Uttar Pradesh
इलाहबाद किले से सटा यह मंदिर लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा वाला एक छोटा किन्तु प्राचीन मंदिर है। यह सम्पूर्ण भारत का केवल एकमात्र मंदिर है जिसमें हनुमान जी लेटी हुई मुद्रा में हैं। यहां पर स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा 20 फीट लम्बी है। जब वर्षा के दिनों में बाढ़ आती है और यह सारा स्थान जलमग्न हो जाता है, तब हनुमानजी की इस मूर्ति को कहीं ओर ले जाकर सुरक्षित रखा जाता है। उपयुक्त समय आने पर इस प्रतिमा को पुन: यहीं लाया जाता है।


2. हनुमानगढ़ी, अयोध्या (Hanuman Garhi,  Ayodhya) :

Hanuman Garhi Ayodhya
धर्म ग्रंथों के अनुसार अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मस्थली है। यहां का सबसे प्रमुख श्रीहनुमान मंदिर हनुमानगढ़ी के नाम से प्रसिद्ध है। यह मंदिर राजद्वार के सामने ऊंचे टीले पर स्थित है। इसमें 60 सीढिय़ां चढऩे के बाद श्रीहनुमानजी का मंदिर आता है।

यह मंदिर काफी बड़ा है। मंदिर के चारों ओर निवास योग्य स्थान बने हैं, जिनमें साधु-संत रहते हैं। हनुमानगढ़ी के दक्षिण में सुग्रीव टीला व अंगद टीला नामक स्थान हैं। इस मंदिर की स्थापना लगभग 300 साल पहले स्वामी अभयारामदासजी ने की थी।


3. सालासर बालाजी हनुमान मंदिर, सालासर, राजस्थान (Salasar Balaji Hanuman Mandir, Salasar, Rajasthan) :

सालासर बालाजी हनुमान मंदिर, सालासर, राजस्थान (Salasar Balaji Hanuman Mandir, Salasar, Rajasthan)
हनुमानजी का यह मंदिर राजस्थान के चूरू जिले में है। गांव का नाम सालासर है, इसलिए सालासर वाले बालाजी के नाम यह मंदिर प्रसिद्ध है। हनुमानजी की यह प्रतिमा दाड़ी व मूंछ से सुशोभित है। यह मंदिर पर्याप्त बड़ा है। चारों ओर यात्रियों के ठहरने के लिए धर्मशालाएं बनी हुई हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और मनचाहा वरदान पाते हैं।


इस मंदिर के संस्थापक श्री मोहनदासजी बचपन से श्री हनुमान जी के प्रति अगाध श्रद्धा रखते थे। माना जाता है कि हनुमान जी की यह प्रतिमा एक किसान को जमीन जोतते समय मिली थी, जिसे सालासर में सोने के सिंहासन पर स्थापित किया गया है। यहाँ हर साल भाद्रपद, आश्विन, चैत्र एवं वैशाख की पूर्णिमा के दिन विशाल मेला लगता है।

4. हनुमान धारा, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश  (Hanuman Dhara, Chitrakoot, Uttar Pradesh) :


हनुमान धारा, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश (Hanuman Dhara, Chitrakoot, Uttar Pradesh)
उत्तर प्रदेश के सीतापुर नामक स्थान के समीप यह हनुमान मंदिर स्थापित है। सीतापुर से हनुमान धारा की दूरी तीन मील है। यह स्थान पर्वतमाला के मध्यभाग में स्थित है। पहाड़ के सहारे हनुमानजी की एक विशाल मूर्ति के ठीक सिर पर दो जल के कुंड हैं, जो हमेशा जल से भरे रहते हैं और उनमें से निरंतर पानी बहता रहता है। इस धारा का जल हनुमानजी को स्पर्श करता हुआ बहता है। इसीलिए इसे हनुमान धारा कहते हैं।

धारा का जल पहाड़ में ही विलीन हो जाता है। उसे लोग प्रभाती नदी या पातालगंगा कहते हैं। इस स्थान के बारे में एक कथा इस प्रकार प्रसिद्ध है- श्रीराम के अयोध्या में राज्याभिषेक होने के बाद एक दिन हनुमानजी ने भगवान श्रीरामचंद्र से कहा- हे भगवन। मुझे कोई ऐसा स्थान बतलाइए, जहां लंका दहन से उत्पन्न मेरे शरीर का ताप मिट सके। तब भगवान श्रीराम ने हनुमानजी को यह स्थान बताया।

5. श्री संकटमोचन मंदिर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश (Shri Sankat Mochan Hanuman Mandir, Varanasi, Uttar Pradesh) :


यह मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में स्थित है। इस मंदिर के चारों ओर एक छोटा सा वन है। यहां का वातावरण एकांत, शांत एवं उपासकों के लिए दिव्य साधना स्थली के योग्य है। मंदिर के प्रांगण में श्रीहनुमानजी की दिव्य प्रतिमा स्थापित है। श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर के समीप ही भगवान श्रीनृसिंह का मंदिर भी स्थापित है। ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी की यह मूर्ति गोस्वामी तुलसीदासजी के तप एवं पुण्य से प्रकट हुई स्वयंभू मूर्ति है।

इस मूर्ति में हनुमानजी दाएं हाथ में भक्तों को अभयदान कर रहे हैं एवं बायां हाथ उनके ह्रदय पर स्थित है। प्रत्येक कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हनुमानजी की सूर्योदय के समय विशेष आरती एवं पूजन समारोह होता है। उसी प्रकार चैत्र पूर्णिमा के दिन यहां श्रीहनुमान जयंती महोत्सव होता है। इस अवसर पर श्रीहनुमानजी की बैठक की झांकी होती है और चार दिन तक रामायण सम्मेलन महोत्सव एवं संगीत सम्मेलन होता है।

6. बेट द्वारका हनुमान दंडी मंदिर, गुजरात (Bet Dwarka Hanuman  Dandi Temple, Gujarat) :

बेट द्वारका दंडी हनुमान मंदिर, गुजरात (Bet Dwarka Dandi Hanuman Temple, Gujarat) 
बेट द्वारका से चार मील की दूरी पर मकर ध्वज के साथ में हनुमानजी की मूर्ति स्थापित है। कहते हैं कि पहले मकरध्वज की मूर्ति छोटी थी परंतु अब दोनों मूर्तियां एक सी ऊंची हो गई हैं। अहिरावण ने भगवान श्रीराम लक्ष्मण को इसी स्थान पर छिपा कर रखा था।

जब हनुमानजी श्रीराम-लक्ष्मण को लेने के लिए आए, तब उनका मकरध्वज के साथ घोर युद्ध हुआ। अंत में हनुमानजी ने उसे परास्त कर उसी की पूंछ से उसे बांध दिया। उनकी स्मृति में यह मूर्ति स्थापित है। कुछ धर्म ग्रंथों में मकरध्वज को हनुमानजी का पुत्र बताया गया है, जिसका जन्म हनुमानजी के पसीने द्वारा एक मछली से हुआ था।

Hanuman Ji History In Immortality And Afterlife

Lord Hanuman is well known for his extreme devotion to Lord Rama. Lord Hanuman is always depicted in the Indian folklaire as an icon of true devotion and a symbol of the power of true devotion and chastity.
Lord Hanuman's devotion to Lord Rama is symbolic of the devotion of the enlightened individual soul towards the supreme soul.
Many stories from the Indian literature tell the tales of Lord Hanuman protecting devotees of Lord Rama and helping those who seek his either spiritually or otherwise. Swami Tulasidas has written these lines in respect of Lord Hanuman's great character, in praise of his powers and also devotion.



Hanuman Ji History In Immortality And Afterlife:

Hanuman's cultural impact extends beyond the epic in which his deeds are celebrated. Lord Hanuman is widely believed to be immortal; thus, although he is a principal figure in the great epic Ramayana, he also makes an appearance in the (historically later, but equally famous) epic Mahabharata, where he meets the hero Bhima.

It is traditionally claimed that Hanuman is present wherever the Ramayana is read:[34]

अमलकमलव- र्णं प्रज्ज्वलत- ्पावकाक्षं- सरसिजनिभवक- ्त्रं सर्वदा सुप्रसन्नम- ् |
पटुतरघनगा- ्रं कुण्डलालङ्- कृताङ्गं रणजयकरवालं- वानरेशं नमामि ||

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यत्र यत्र रघुनाथकीर्- तनं तत्र तत्र कृतमस्तकाञ- ्जलिम् ।
बाष्पवारि- परिपूर्णलो- चनं मारुतिं नमत राक्षसान्त- कम् ॥

yatra yatra raghunāthakīrtanaṃ tatra tatra kṛta mastakāñjalim ।
bāṣpavāriparipūrṇalo- canaṃ mārutiṃ namata rākṣasāntakam ॥

“Bow down to Hanumān, who is the slayer of demons, and who is present with head bowed and eyes full of flowing tears wherever the fame of Rāma is sung.”
Similar claims can be found in other texts, such as the Vinaya Patrika by Tulsidas, with only slight variations in language. During readings of the Ramayana, a special puja and space ("asana", or seat) are reserved for Hanuman.

A number of religious leaders have claimed to have seen Hanuman over the course of the centuries, notably Madhvacharya (13th cent. CE), Tulsidas (16th cent.), Samarth Ramdas (17th cent.), Raghavendra Swami(17th cent.) and Swami Ramdas (20th cent.). Swaminarayan, founder of the Swaminarayan sect of Hinduism, elevated Hanuman to a special position by instructing his followers that other than worshipping God through the Narayana Kavacha, Hanuman was the only deity that they could worship in the event of trouble by evil spirits.